Wednesday, June 20, 2007

कुछ शेर ० शायरी

शिकवा भी हज़ारों हैं , शिक़ायत भी बहुत हैं,
इस दिल को मगर उससे मोहब्बत भी बहुत है।

आ जाता है मिलने तस्सवूर मे सरे-शाम
इक शख्स कि इतनी सी इनायत भी बहूत है ।

ये भी तमन्ना है कि उसे दिल से भूला दें
इस दिल को मगर उसकी जरूरत भी बहुत है।

Source : unknown

2 comments:

Divine India said...

कितने सुंदर भाव उकेरे हैं शब्दों के द्वारा और गज़ल जो गीत बन गई……। बहुत अच्छा है…लिखते रहे।

Manoj said...

शुक्रिया, पर ये मैंने नही लिखे हैं। इसीलिये मैंने Source : Unkown लिखा था।
फिर भी आपकी हौसलाफ्जाई के लिए धन्यवाद.