Saturday, June 2, 2007

हिंदी vs English Blogger

पिछले कुछ दिनों में मैंने कुछ हिंदी bloggers के कई blogs पढे। उनमें से अधिकांश काफी बढ़िया हैं। एक अंतर जो मैं हिंदी और इंग्लिश Blogging के बीच पाता हूँ कि इंग्लिश bloggers मे से अधिकांश लोग Blogging को diary की तरह इस्तेमाल करते हैं जबकि हिंदी के bloggers अपने आप को पत्रकार समझते हुए आये दिन हुए घटनाओं पर टिपण्णी करने के लिए या फिर अपनी कविता/ साहित्य प्रेम के लिए।
ऐसा क्यों है की अधिकांश हिंदी bloggers धुर हिंदुत्व और capitalism विरोधी होते हैं? हालांकि इनमे से अधिकांश इसी की कमाई खा रहे होते हैं। इनमें से सब के सब अपने पता नही किस सुनहरे अतीत की याद मे खोये दिखाई देते हैं , इन्हें अपने गावों में बिताये हुए सुनहरे दिन भुलाये नही भूलता और जो शहर इन्हें खाना, रहना और एक जिन्दगी दे रहा है वो कभी Concrete तो कभी निर्दयी प्रतीत होता है। यदि गांव इतने ही बेहतर और वँहा की जिंदगी इतनी ही शांत और मधुर थी तो आख़िर इन लोगों को वँहा वापिस जाने से रोक कौन रहा है?
मेरी समझ में इनमे से अधिकांश लोग खुद अपने विरोधी हैं, इन्हें आप कंही भी किसी भी परिस्थिति मे रखिये परेशान रहने, उदास रहने का बहाना खोज ही लेंगें। या फिर शायद ये हमेशा ही २ धरातल पर जीने वाले लोग हैं । एक वो जो इनकी वास्तविक दुनिया है, जो इन्हें रोजगार देती है, खाने को रोटी का इंतजाम करती है और दूसरी जो इनके बौद्धिक खुजाल को मिटाती है।
बेहतर हो यदि हमारी सोच और हमारे काम में एक सामंजस्य हो। हम वही बोलें जो हम सोच रहें हैं और वही करें जो हम बोल रहे हैं।
मनोज

5 comments:

Raviratlami said...

आपके विचारों से तो लगता है कि आपने मात्र चंद हिन्दी चि्ट्ठे पढ़ कर अपनी राय दे दी.

बंधु हिन्दी चिट्ठाजगत् चार साल पुराना है. छः महीने पहले का कोई भी चिट्ठा पढ़ लें आपकी राय बदलते देर नहीं लगेगी.

Shrish said...

रवि जी सहमत हूँ कि आपने कुछेक चिट्ठों के आधार पर ही राय बना ली है। इंग्लिश ब्लॉगों जितनी न सही लेकिन फिर भी काफी वैरायटी हिन्दी ब्लॉगों में भी है।

"एक अंतर जो मैं हिंदी और इंग्लिश Blogging के बीच पाता हूँ कि इंग्लिश bloggers मे से अधिकांश लोग Blogging को diary की तरह इस्तेमाल करते ह"

ऐसा नहीं है, बहुत से हिन्दी ब्लॉगर भी ब्लॉग डायरी की तरह इस्तेमाल करते हैं। जरा नारद की आर्काइव्स पढ़िए।

http://narad.akshargram.com

संजय बेंगाणी said...

यहाँ थोड़ा समय बितायें, आपकी धारणाएं बदल जाएगी.

Manoj said...

रवि जी, श्रीश जी और संजय जी,
आपके comments के लिए शुक्रिया। आप लोगों का कहना सही है कि मैंने काफी कम ही हिंदी blogging sites पढी हैं । पर मेरा मुख्य सवाल ऐसे लोगों से था या उनके लिए था जो रहते तो शहरों मे हैं पर गीत गाँव के गाते रहते हैं। या फिर job साउथ इंडिया मे कर रहे होतें हैं और साथ ही साथ साउथ इंडिया को गालियाँ भी देते रहतें हैं। मेरा ऐसे लोगों से ये कहना है कि ये immoral है। जो शहर आपका और आपके परिवार का पेट पाल रहा है उसकी बिना मतलब कि निंदा करते रहना अचि बात नही है ।
श्रीश जी, मैं तो खुद भी चाहता हूँ कि blogging महज लोगों कि diary बंकर ना रह जाये बल्कि समान विचारधारा के लोगों को एक साथ जोड़ने वाली कड़ी बने।
मनोज

विष्णु बैरागी said...

मनोजजी,

आपकी उतावली और खीझ ने आत्‍मा प्रसन्‍न कर दी । मैं भी इसी तरह भन्‍नाता रहता हूं । लगा किसी और के नाम से मैं अपनी बात पढ रहा हूं ।

मैं नया-नया ब्‍लागिया हूं और श्री रवि रतलामी मेरे उस्‍ताद हैं । हिन्‍दी ब्‍लाग चार साल पुराना होने के बावजूद अपने शैशवकाल में ही है । शिकायत करने से अच्‍छा है कि आप इसे जो शकल देना चाहते हैं उसके लिए निरन्‍तर कोशिशें करें । जो कुछ करना है, खुद को करना है । दूसरे पर किसी का क्‍या जोर । आप जितनी अधिक अपेक्षा करेंगे, उतने ही अधिक दुखी होंगे ।
अपनी बात कहते रहिए और लोगों को अपनी बात कहते रहने दीजिए । इसी में आनन्‍द है ।