काफी पहले तुलसीदास जी ने जो कहा था, वो शायद शाश्वत सत्य है। यही प्रकृति का एकमात्र सत्य है। इस बात जितनी जल्दी हम समझ लें उतना बेहतर होता है। हाल ही में राज ठाकरे ने मुम्बई में बसने वाले बिहारिओं और UP के लोगों के पहले धर्म का मजाक उडाया और फिर उनके मुम्बई में रहने के अधिकारों पर। हमारे नेता लोगों ने जो बोलना था वो बोला। ऐसा नही होना चाहिए, ये देश कि एकता के खिलाफ है , ऐसा करने वालों के साथ सख्त कारवाई कि जायेगी blah blah.... मीडिया को बैठे बिठाये ३-४ दिनों कि खुराक मिल गयी। वैसे भी डॉ अमित कुमार के पकडे जाने के बाद कोई मसाला बचा नही था...
पर यदि समस्याएँ बातों से समाप्त हो जाती तो शायद सारी दुनिया यशराज चोपडा कि मूवी से भी ज्यादा खूबसूरत होती। हल एक ही है... बिहार का विकास। और सवाल महज ईतना कि "मैं "इसमे क्या भूमिका अदा करूंगा?
मनोज
Sunday, February 10, 2008
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2 comments:
क्या आपको लगता है की अगर बिहार का विकास हो जाए तो मुम्बई मे यह सब बकवास नही होगी? क्या आप को लगता है की बिहारी सिर्फ़ मुम्बई मे हैं? तो फिर यह सब मुम्बई मे ही क्यों पूरे देश में क्यों नही ? क्या मराठी ही कुछ जयादा जागरूक है, पुरा देश नही ? नही , यह सिर्फ़ इस लिए क्योकि ठाकरे सिर्फ़ मुम्बई मे हैं. अगर यह सारे देश में हो जायें तो जगह जगह पाकिस्तान बनने में देर नही लगेगी. जब तक नफरत की आग पर राजनीती की रोटियां सकने वालों की छुट्टी नही होगी कुछ नही सुधरने वाला. मैं इसमे सिर्फ़ यह कर सकता हूँ की देश के इन फ्लू फैलाने वाले चूजों और मुर्गियों को पहचान कर इनको और इनका साथ देने वालों दफ़न कर दु ताकि यह फ्लू और न फैले.
इसमे कोई 2 मत नही है कि इस उत्पात के पीछे ठाकरे कि गद्दारी है (मुझे वो देशद्रोही के अलावे कुछ नही लगता). पर इसी बहाने उसने हमे ये फिर से याद दिलाने कि कोशिश कि है कि हमारा राज्य कितना पीछे है . राज ठाकरे को सजा देना वंहा के लोगों का काम है या फिर न्यायपालिका का, पर मैं जो भूमिका निभा सकता हूँ वो बिहार में ही हो सकता है.
साथ ही आप ये भी सोचिये कि मुम्बई में तो गुजराती और साउथ इंडियन भी काफ़ी ज्यादा हैं, पूरे Bolywood पर पन्जाबिओं का कब्जा है, जो हर वक्त PUNJAB का पुत्तर या PUNJAB दा शेर का गुणगान करते हैं फिर हमला सिर्फ़ गंगा किनारे वालों पर ही क्यों? क्योंकि हम कमजोर हैं, क्योंकि हम divided हैं, क्योंकि हम आर्थिक रूप से पिछडे हैं.
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